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कमर तोड़ महंगाई की मार

नीतू यादव, जयपुर
कोरोना के दंश को झेल कर जहां देश अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में लगा ही था, जिसमें थोड़ी और राहत चुनावों ने भी दी, क्योंकि चुनाव हैं तो सब चीजें सस्ती तो होंगी ही, लेकिन चुनावों के बाद अब ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे सरकार द्वारा ‘महंगाई का घोषणापत्र’ जारी कर दिया गया हो। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, ऐसा लगता है जैसे महंगाई भी उसी क्रम में आसमान छू रही है। 

लोगों को आशा थी कि कोरोना लगभग 2 वर्षों के बाद कम हुआ है तो अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, लेकिन कम होने की बजाय महंगाई दोगुनी गति से बढ़ती जा रही है। घर की रसोई चलाना एक चुनौतीपूर्ण काम हो गया है, गैस सिलैंडर का मूल्य आग की तरह बढ़ता जा रहा है और सबसे महत्वपूर्ण चीज, जिस पर बाकी सारी चीजें निर्भर करती हैं, पैट्रोल व डीजल में तो मानो दौड़ लगी है कि कौन पहले सबसे ऊंचा आंकड़ा छुएगा। 

मध्यमवर्ग हो या उच्च वर्ग, कोरोना की त्रासदी के कारण सबका बजट चौपट हुआ, लेकिन समय के साथ-साथ धीरे-धीरे मध्यमवर्ग व निम्न वर्ग की आर्थिक स्थिति पटरी पर आने ही लगी थी कि जनता पर महंगाई का ऐसा वज्रपात हुआ कि इसकी मार से सभी त्रस्त हैं, चाहे कर्मचारी वर्ग हो, मजदूर, व्यापारी या किसान-बागवान, सभी महंगाई से विचलित और परेशान हैं। 

आज पैट्रोल-डीजल के दाम 100 के पार पहुंच चुके हैं, जिस कारण जहां आम आदमी परेशान है, वहीं व्यापारी वर्ग भी परेशान है जिसके चलते सब्जियों के दाम आसमान पर चढ़ गए हैं और दूसरी वस्तुओं के दाम भी धीरे-धीरे पहुंच से बाहर हो रहे हैं। समय रहते केंद्र सरकार को महंगाई पर लगाम कसनी चाहिए, ताकि जनता को परेशानी न हो और उसमें उसका विश्वास बना रहे, लेकिन अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो श्रीलंका जैसा हाल भारत में होते अधिक समय नहीं लगेगा। 

अब तो स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि महंगाई के चलते गरीब परिवार, यानी दिहाड़ी लगा कर गुजर-बसर करने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर संकट छा गया है। डिपुओं का राशन भी मूल्यों को रफ्तार देता प्रतीत होता है। सरकार को सबसिडी प्रक्रिया शुरू करके जनता को राहत देनी चाहिए। इस महंगाई के पीछे कहीं न कहीं वैश्विक उथल-पुथल, बढ़ती जनसंख्या, तेल के दाम तो हैं ही, बेरोजगारी और केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों की पैट्रोल-डीजल और गैस पर संग्रहित करों पर निर्भरता ने आम आदमी का जीवन हलकान कर दिया है। आम जनमानस के समक्ष जीवनयापन के लिए महामारी से ज्यादा संकट खड़ा हो गया है। महंगाई के पीछे छिपे कई कारणों में से एक वैश्विक मंच पर रूस-यूक्रेन युद्ध का भी असर विद्यमान है। 

आज बाजार व व्यापार में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसके मूल्य में वृद्धि न हुई हो। खाना बनाने के तेल से लेकर वाहन ईंधन के मूल्यों ने इंसानों का तेल निकाल दिया है। चाहे कुछ भी हो, सरकारों को महंगाई पर लगाम लगानी होगी अन्यथा एक समय ऐसा आ जाएगा जब लगाम लगाना तो दूर मूल्यों को नियंत्रित करना भी चुनौती हो जाएगा। श्रीलंका में वर्तमान हालात इस बात की स्पष्ट गवाही देते हैं। वर्तमान समय में जनता के हित को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार को तेल व अन्य वस्तुओं की मूल्यवृद्धि पर कड़े निर्णय लेने की आवश्यकता है। इसके लिए चुनाव नजदीक होना आवश्यक नहीं।-प्रो. मनोज डोगरा

देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, खासतौर से अगर बीते कुछ दिनों में देखा जाए तो पेट्रोल डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. 2 सप्ताह के अंदर पेट्रोल और डीजल दोनों के दामो में तकरीबन चार रुपए की बढ़त हुई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर हो रहा है. तेल के दाम बढ़ने के साथ-साथ बाकी चीजों पर भी महंगाई का असर धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है और ऐसे में चाहे एक ग्रहणी हो या फिर बाहर काम करने वाला कोई शख्स, दोनों के लिए घर और बाहर का खर्च इस वक्त मुश्किल होता जा रहा है.


बढ़ती महंगाई का असर एक आम आदमी पर कितना हो रहा है, इसको जानने के लिए हमने दिल्ली में रहने वाली किरण पाठक से बात की. किरण एक ग्रहणी होने के साथ-साथ वर्किंग विमेन भी हैं. वह अपने आप घर तो संभालती ही हैं, साथ-साथ बाहर जाकर बच्चों को होम ट्यूशन भी देती है. किरण बताती है कि पहले वह बच्चों को ट्यूशन देने के लिए अपनी स्कूटी से जाया करती थीं, लेकिन जैसे-जैसे पेट्रोल के दाम बढ़ते जा रहे हैं, उन्होंने अब स्कूटी से जाना-आना भी छोड़ दिया है और ट्यूशन देने के लिए अब वह पैदल ही चली जाती है. काम करने के साथ-साथ उनके ऊपर किचन की भी जिम्मेदारी है और आज के वक्त में किचन का खर्चा कुछ कम नहीं है. दाल, चावल, सब्जी, आटा सबके दाम बड़े हुए हैं. एलपीजी का दाम ₹50 और बढ़ गया है. किरण के मुताबिक पहले जहां अपनी सैलरी से वह 40% तक सेविंग कर लेती थी तो वहीं अब उनकी सैलरी से एक रुपया भी नहीं बचता. 

देश मे पेट्रोल और डीज़ल महंगा होता जा रहा है. आज सोमवार को पेट्रोल 30 पैसे और डीजल 35 पैसे महंगा हो गया है. यह कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99 रुपए 41 पैसे और डीजल 90 रुपए 77 पैसे तक पुहंच गया है. तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर है. डीजल की बढ़ रही कीमत खाने पीने की चीजों को महंगा कर देती हैं. सब्जियां, दूध. सभी चीजों पर दाम बढ़ जाते है, जिस कारण आम आदमी  चिंता में है. 



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